दिनांक: 27 दिसंबर 2025
लेखक: Ajay Verma
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अंतिम अभियोजन विवरण (Final Prosecution Complaint) न्यायालय में दाखिल कर दिया है। इस चार्जशीट में 59 नए आरोपियों को शामिल किया गया है, जिसके बाद इस मामले में कुल आरोपियों की संख्या बढ़कर 81 हो गई है। इस कदम को जांच प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण और निर्णायक चरण माना जा रहा है।

क्या है छत्तीसगढ़ शराब घोटाला
छत्तीसगढ़ शराब घोटाला राज्य में शराब के निर्माण, परिवहन और बिक्री से जुड़े एक कथित संगठित भ्रष्टाचार नेटवर्क से संबंधित है। जांच एजेंसियों के अनुसार, सरकारी शराब नीति का दुरुपयोग कर निजी लाभ के लिए करोड़ों रुपये का अवैध लेन-देन किया गया। इस घोटाले से राज्य सरकार को भारी राजस्व नुकसान पहुंचने का आरोप है।
ED की जांच में क्या सामने आया
प्रवर्तन निदेशालय की जांच में मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े कई अहम सबूत सामने आए हैं। ईडी का दावा है कि अवैध रूप से अर्जित धन को विभिन्न माध्यमों से सफेद किया गया। जांच के दौरान कई संपत्तियों को जब्त किया गया और बैंक लेन-देन, डिजिटल रिकॉर्ड तथा बयान के आधार पर आरोपियों की भूमिका तय की गई।
59 नए आरोपियों को क्यों किया गया शामिल
अंतिम अभियोजन विवरण में शामिल किए गए 59 नए आरोपी कथित तौर पर घोटाले की पूरी श्रृंखला में सक्रिय भूमिका निभाते पाए गए। इनमें कारोबारी, बिचौलिए, पूर्व अधिकारी और अन्य सहयोगी शामिल बताए जा रहे हैं। ईडी का कहना है कि इन आरोपियों के बिना घोटाले का नेटवर्क पूरा नहीं हो सकता था।
राजनीतिक हलकों में बढ़ी हलचल
चार्जशीट दाखिल होने के बाद राज्य की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। विपक्ष इस मामले को भ्रष्टाचार का बड़ा उदाहरण बता रहा है, वहीं सत्तापक्ष का कहना है कि जांच एजेंसियां कानून के तहत स्वतंत्र रूप से कार्य कर रही हैं।
आगे क्या हो सकता है
अंतिम अभियोजन विवरण दाखिल होने के बाद अब न्यायालय में सुनवाई की प्रक्रिया तेज होने की संभावना है। आरोप तय होने के बाद मुकदमे की नियमित सुनवाई शुरू होगी। इस मामले का असर राज्य की प्रशासनिक और राजनीतिक दिशा पर भी पड़ सकता है।
डिस्क्लेमर:
यह लेख विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स और प्रवर्तन निदेशालय द्वारा जारी आधिकारिक जानकारियों पर आधारित है। इसमें दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल सूचना प्रदान करना है। किसी भी कानूनी निष्कर्ष या अंतिम निर्णय के लिए न्यायालय के आदेश एवं आधिकारिक दस्तावेजों को ही प्रामाणिक माना जाए।













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