लेखक: अजय वर्मा
छत्तीसगढ़ की प्राचीन और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने की दिशा में एक बड़ा कदम आगे बढ़ा है। महासमुंद जिले में स्थित ऐतिहासिक नगरी सिरपुर अब UNESCO विश्व धरोहर सूची में शामिल होने की दहलीज़ पर खड़ी है। प्राकृतिक सौंदर्य और अद्भुत पुरातात्विक धरोहरों से समृद्ध सिरपुर को विश्व विरासत घोषित करने की प्रक्रिया तेज हो गई है, जिससे राज्य और देश के लिए गौरव का क्षण बन सकता है।

सिरपुर का ऐतिहासिक महत्व
सिरपुर प्राचीन भारत का एक प्रमुख धार्मिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक केंद्र रहा है। यह स्थल 6वीं से 10वीं शताब्दी के दौरान बौद्ध, शैव और वैष्णव परंपराओं का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। यहां स्थित लक्ष्मण मंदिर, बौद्ध विहार, स्तूप और प्राचीन शिलालेख उस दौर की समृद्ध स्थापत्य कला और धार्मिक सहिष्णुता को दर्शाते हैं। इतिहासकारों के अनुसार, सिरपुर दक्षिण कोसल की राजधानी भी रह चुका है।
UNESCO सूची में शामिल होने की प्रक्रिया
सिरपुर को विश्व धरोहर सूची में शामिल करने के लिए राज्य सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा लंबे समय से प्रयास किए जा रहे हैं। UNESCO के मानकों के अनुसार स्थल के ऐतिहासिक महत्व, संरक्षण स्थिति और वैश्विक मूल्य का विस्तृत दस्तावेज तैयार किया गया है। विशेषज्ञों की टीम ने सिरपुर का निरीक्षण कर इसकी प्रामाणिकता और संरक्षण व्यवस्था का आकलन किया है, जिसके बाद स्वीकृति की संभावना को मजबूत माना जा रहा है।
पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
यदि सिरपुर को UNESCO विश्व धरोहर का दर्जा मिलता है, तो इससे छत्तीसगढ़ के पर्यटन को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। देश-विदेश से पर्यटक यहां आकर्षित होंगे, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। होटल, परिवहन, हस्तशिल्प और स्थानीय व्यवसायों के लिए नए अवसर पैदा होंगे। साथ ही सिरपुर अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर अपनी अलग पहचान बना सकेगा।
संरक्षण और विकास की नई जिम्मेदारी
विश्व धरोहर का दर्जा मिलने के साथ ही सिरपुर के संरक्षण की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाएगी। इसके लिए बुनियादी सुविधाओं का विकास, संरचनाओं का वैज्ञानिक संरक्षण और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने पर विशेष ध्यान देना होगा। सरकार का कहना है कि विकास और संरक्षण के बीच संतुलन बनाकर ही इस धरोहर को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जाएगा।
स्थानीय लोगों में उत्साह
सिरपुर को UNESCO की संभावित सूची में शामिल किए जाने की खबर से स्थानीय लोगों में खासा उत्साह है। उन्हें उम्मीद है कि इससे क्षेत्र का समग्र विकास होगा और युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। सांस्कृतिक कार्यक्रमों, शोध और शिक्षा के क्षेत्र में भी सिरपुर की भूमिका और मजबूत हो सकती है।
छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण
यदि सिरपुर को विश्व धरोहर का दर्जा मिलता है, तो यह छत्तीसगढ़ के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि होगी। इससे न केवल राज्य की प्राचीन विरासत को वैश्विक मंच मिलेगा, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विविधता और ऐतिहासिक धरोहरों की समृद्ध परंपरा को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।
डिस्क्लेमर: यह लेख विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स, ऐतिहासिक संदर्भों और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारियों पर आधारित है। UNESCO से संबंधित अंतिम निर्णय और आधिकारिक घोषणा होने पर ही जानकारी की पूर्ण पुष्टि मानी जाए। लेख का उद्देश्य केवल सामान्य सूचना प्रदान करना है।













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