यूपी में राजनीतिक बयानबाज़ी तेज: डिप्टी सीएम बृजेश पाठक का राहुल गांधी पर हमला

दिनांक: 25 फरवरी 2026
लेखक: अजय वर्मा

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाज़ी का दौर तेज हो गया है। प्रदेश के उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोलते हुए उनके ‘मोहब्बत की दुकान’ अभियान को लेकर सवाल उठाए हैं। पाठक ने आरोप लगाया कि इस तरह के प्रचार से समाज में घृणा और नफरत फैलती है तथा इसे भारत विरोधी राजनीति का हिस्सा बताया।

क्या कहा बृजेश पाठक ने?

डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान कहा कि राहुल गांधी का ‘मोहब्बत की दुकान’ जैसा नारा केवल दिखावटी राजनीति है। उनके अनुसार, इस तरह के अभियानों के पीछे वास्तविकता कुछ और है और यह समाज को बांटने का प्रयास है। पाठक ने दावा किया कि जनता अब ऐसे नारों की सच्चाई समझ चुकी है।

राहुल गांधी का अभियान

राहुल गांधी द्वारा चलाया जा रहा ‘मोहब्बत की दुकान’ अभियान सामाजिक सौहार्द और प्रेम का संदेश देने के उद्देश्य से शुरू किया गया बताया जाता है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह पहल नफरत की राजनीति के खिलाफ एक प्रतीकात्मक संदेश है। हालांकि भाजपा नेताओं का आरोप है कि यह केवल राजनीतिक लाभ के लिए चलाया गया अभियान है।

कांग्रेस की संभावित प्रतिक्रिया

कांग्रेस पार्टी ने पूर्व में ऐसे आरोपों को निराधार बताया है और कहा है कि उनका अभियान सामाजिक एकता और भाईचारे को बढ़ावा देने के लिए है। पार्टी नेताओं का तर्क है कि भाजपा अनावश्यक रूप से विवाद खड़ा कर रही है ताकि मूल मुद्दों से ध्यान भटकाया जा सके।

चुनावी माहौल में बयानबाज़ी

आगामी चुनावों को देखते हुए उत्तर प्रदेश में राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है। विभिन्न दल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे बयान समर्थकों को सक्रिय करने और राजनीतिक ध्रुवीकरण बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा हो सकते हैं।

जनता की नजरें मुद्दों पर

राजनीतिक बयानबाज़ी के बीच आम जनता रोजगार, महंगाई, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर ठोस समाधान चाहती है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि चुनावी माहौल में कौन सा मुद्दा प्रमुखता से उभरता है और मतदाता किस आधार पर अपना निर्णय लेते हैं।

Disclaimer: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध समाचार स्रोतों और राजनीतिक बयानों के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें उल्लिखित आरोप संबंधित नेताओं के वक्तव्यों पर आधारित हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस लेख में नहीं की गई है। आधिकारिक और विस्तृत जानकारी के लिए संबंधित राजनीतिक दलों या विश्वसनीय समाचार स्रोतों का संदर्भ अवश्य लें।

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