गृह मंत्री अमित शाह ने कहा — “21 माओवादी मुख्यधारा में लौटे, यह बड़ी सफलता है”

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा — “21 माओवादी मुख्यधारा में लौटे, यह बड़ी सफलता है”

तारीख: 27 अक्टूबर 2025 | लेखक: अजय वर्मा

छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में 21 माओवादी कैडर (जिनमें 13 वरिष्ठ सदस्य शामिल हैं) ने आत्मसमर्पण कर हिंसा का रास्ता छोड़ दिया। गृह मंत्री अमित शाह ने इस घटना को “शांति और विकास की दिशा में एक बड़ी सफलता” बताया और कहा कि यह केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों का परिणाम है।

अमित शाह ने एक्स (Twitter) पर लिखा — “21 माओवादी साथ में हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटे हैं। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नक्सलवाद समाप्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।”

कांकेर में आत्मसमर्पण की बड़ी घटना

कांकेर जिले में सुरक्षा बलों के समक्ष माओवादियों ने हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक सामग्री जमा कर दी। आत्मसमर्पण करने वालों में संगठन के कई अनुभवी कैडर शामिल हैं जो वर्षों से जंगलों में सक्रिय थे। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह आत्मसमर्पण लंबे समय से चल रहे “लोन वर्राटू” (घर वापसी) अभियान का हिस्सा है।

सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह घटना नक्सल संगठन के लिए एक बड़ा मनोवैज्ञानिक झटका है और आने वाले महीनों में और भी माओवादी आत्मसमर्पण कर सकते हैं।

अमित शाह का बयान और नक्सलवाद समाप्त करने का लक्ष्य

गृह मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा, विकास और संवाद — इन तीन स्तंभों पर समानांतर रणनीति बनाई है। उन्होंने दोहराया कि “सरकार का लक्ष्य 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त करना है।”

उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर ऐसे लोगों को पुनर्वास और रोज़गार के अवसर प्रदान कर रही हैं जो हिंसा छोड़कर समाज में लौटना चाहते हैं।

‘लोन वर्राटू’ नीति का असर

छत्तीसगढ़ सरकार की ‘लोन वर्राटू’ (घर वापसी) नीति का उद्देश्य माओवादियों को पुनर्वास योजनाओं के माध्यम से समाज की मुख्यधारा में शामिल करना है। इस नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वालों को आर्थिक सहायता, सुरक्षा और रोजगार से जुड़ी सुविधाएँ दी जाती हैं।

अब तक सैकड़ों नक्सली इस योजना के तहत आत्मसमर्पण कर चुके हैं, जिससे राज्य के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी शांति स्थापित करने की दिशा में प्रगति हुई है।

स्थानीय जनता और प्रशासन की प्रतिक्रिया

स्थानीय प्रशासन ने इसे क्षेत्र में शांति स्थापित करने की दिशा में सकारात्मक कदम बताया है। ग्रामीणों ने भी राहत जताई कि लगातार हो रही हिंसक घटनाओं में अब कमी आ सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार इसी प्रकार पुनर्वास और विकास दोनों पर ध्यान देती रही, तो नक्सलवाद का स्थायी समाधान संभव है।

डिस्क्लेमर

यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध समाचार स्रोतों और गृह मंत्री के आधिकारिक बयानों पर आधारित है। घटनाओं और आँकड़ों में समय-समय पर परिवर्तन संभव है। कृपया किसी भी आधिकारिक पुष्टि के लिए गृह मंत्रालय या छत्तीसगढ़ पुलिस की वेबसाइट देखें।

यह लेख केवल सूचना और जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है, इसमें किसी व्यक्ति या संस्था के प्रति कोई पूर्वाग्रह या टिप्पणी निहित नहीं है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *