प्रयागराज में इंदिरा मैराथन 2025 में पहली बार लागू होगी “चिप-बिब” प्रणाली

प्रयागराज में इंदिरा मैराथन 2025 में पहली बार लागू होगी “चिप-बिब” प्रणाली

लेखक: Ajay Verma | दिनांक: 29 अक्टूबर 2025

40वीं इंदिरा मैराथन की तैयारी जोरों पर

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आगामी 19 नवंबर 2025 को होने वाली 40वीं इंदिरा मैराथन की तैयारियाँ जोरों पर हैं। इस वर्ष की मैराथन को खास बनाने के लिए आयोजकों ने कई तकनीकी और प्रबंधन सुधार किए हैं। इस मैराथन में पहली बार धावकों के लिए “चिप-बिब प्रणाली” लागू की जाएगी, जिससे परिणाम और समय-ट्रैकिंग में अधिक पारदर्शिता आएगी।

क्या है “चिप-बिब” प्रणाली?

“चिप-बिब” प्रणाली दुनिया की प्रसिद्ध मैराथनों जैसे बोस्टन, बर्लिन और लंदन मैराथन में वर्षों से इस्तेमाल हो रही है। इसमें प्रत्येक धावक को एक विशेष बिब (Bib) नंबर दिया जाता है, जिसमें एक इलेक्ट्रॉनिक चिप लगी होती है। यह चिप स्टार्ट और फिनिश लाइन पर लगे सेंसरों से कनेक्ट होती है, जिससे हर धावक का समय अपने आप रिकॉर्ड हो जाता है। इससे गलत टाइमिंग, विवाद या मानवीय त्रुटि की संभावना लगभग समाप्त हो जाती है।

पारदर्शिता और निष्पक्षता में बढ़ोतरी

इंदिरा मैराथन समिति के आयोजकों का कहना है कि “चिप-बिब प्रणाली” लागू करने का मुख्य उद्देश्य पारदर्शिता और निष्पक्षता को बढ़ाना है। अब हर प्रतिभागी का टाइमिंग डेटा स्वतः रिकॉर्ड होगा और डिजिटल परिणाम तत्काल जारी किए जा सकेंगे। आयोजन समिति के प्रमुख ने बताया कि इससे न केवल राष्ट्रीय धावकों को विश्वस्तरीय अनुभव मिलेगा, बल्कि भविष्य में अंतरराष्ट्रीय मैराथनों की मेजबानी के लिए प्रयागराज की साख भी बढ़ेगी।

मैराथन में भागीदारी और नई सुविधाएँ

इस बार मैराथन में देशभर से लगभग 15,000 धावकों के शामिल होने की उम्मीद है। आयोजन स्थल पर लाइव ट्रैकिंग, मोबाइल ऐप आधारित रजिस्ट्रेशन और स्वास्थ्य जांच केंद्र जैसी नई सुविधाएँ जोड़ी गई हैं। महिला व वरिष्ठ नागरिक वर्गों के लिए अलग श्रेणियाँ भी बनाई गई हैं। प्रयागराज प्रशासन ने यातायात नियंत्रण, स्वास्थ्य सुविधाएँ और सुरक्षा के लिए विशेष योजनाएँ तैयार की हैं, ताकि मैराथन पूरी तरह सफल और सुचारू रहे।

खेल जगत में सकारात्मक प्रतिक्रिया

मैराथन धावक और खेल विशेषज्ञों ने इस पहल का स्वागत किया है। उनका कहना है कि भारत में अब मैराथनों का स्तर अंतरराष्ट्रीय मानकों तक पहुँच रहा है। “चिप-बिब” जैसी तकनीक न केवल धावकों के प्रदर्शन का सही मूल्यांकन करेगी, बल्कि नई पीढ़ी को खेलों में तकनीक की अहमियत भी सिखाएगी।

डिस्क्लेमर

सूत्र: यह लेख प्रयागराज जिला प्रशासन और इंदिरा मैराथन आयोजन समिति द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है।

उत्तरदायित्व: इस लेख का उद्देश्य केवल जानकारी प्रदान करना है। आयोजनों से संबंधित समय, नियम या तकनीकी विवरण भविष्य में बदल सकते हैं। नवीनतम जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाइट या जिला प्रशासन के अपडेट देखें।

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