लेखक: अजय वर्मा | प्रकाशन तिथि: 1 नवंबर 2025
नई दिल्ली: भारत की राजधानी दिल्ली सहित नौ राज्यों और चार केंद्रशासित प्रदेशों का आज स्थापना दिवस मनाया जा रहा है। इस अवसर पर लाल किले के प्रांगण में एक भव्य राष्ट्रीय समारोह आयोजित किया गया है। इस समारोह में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्रीमंडल के सदस्य और कई राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल होंगे।

स्थापना दिवस का ऐतिहासिक महत्व
1 नवंबर भारत के प्रशासनिक इतिहास में विशेष स्थान रखता है। 1956 में राज्य पुनर्गठन अधिनियम लागू होने के बाद कई राज्यों की सीमाएँ और स्वरूप निर्धारित किए गए थे। उसी दिन से कई राज्यों का “स्थापना दिवस” मनाने की परंपरा शुरू हुई।
इस वर्ष जिन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों का स्थापना दिवस है, उनमें शामिल हैं — दिल्ली, मध्य प्रदेश, हरियाणा, कर्नाटक, केरल, छत्तीसगढ़, पंजाब, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, और उत्तराखंड के साथ-साथ पुदुच्चेरी, लक्षद्वीप, चंडीगढ़ और दिल्ली।
लाल किले में आयोजित समारोह की झलक
लाल किले पर आयोजित मुख्य कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उपस्थित रहेंगे। समारोह की शुरुआत राष्ट्रगान और राज्यों की सांस्कृतिक झांकियों से होगी।
इस अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों से आए कलाकार अपने-अपने राज्यों की पारंपरिक कला, नृत्य और संगीत प्रस्तुत करेंगे। “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” थीम के तहत इस बार समारोह का उद्देश्य देश की एकता और विविधता को प्रदर्शित करना है।
राज्यों की उपलब्धियाँ और प्रदर्शनियाँ
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न राज्यों की विकास उपलब्धियाँ प्रदर्शित की जाएंगी। केरल की डिजिटल शिक्षा परियोजना, मध्य प्रदेश की स्टार्टअप नीति, और कर्नाटक की ग्रीन-एनर्जी पहल विशेष आकर्षण रहेंगी।
केंद्र सरकार के संस्कृति मंत्रालय ने बताया कि इस समारोह के माध्यम से भारत के हर क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को एक मंच पर लाने का प्रयास किया गया है। लाल किले के प्रांगण को फूलों, रोशनी और झंडों से सजाया गया है।
प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति का संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में कहा, “भारत की विविधता ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है। स्थापना दिवस हमें यह याद दिलाता है कि अलग-अलग भाषाएँ, परंपराएँ और संस्कृतियाँ मिलकर एक भारत का निर्माण करती हैं।”
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी राष्ट्र को बधाई देते हुए कहा कि सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को अपनी पहचान और संस्कृति पर गर्व होना चाहिए, और विकास के पथ पर आगे बढ़ने के लिए मिलजुलकर प्रयास करना चाहिए।
नागरिकों में उत्साह और सहभागिता
राजधानी के अलावा अन्य राज्यों में भी स्थानीय स्तर पर परेड, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सम्मान समारोह आयोजित किए जा रहे हैं। स्कूलों और कॉलेजों में विद्यार्थियों द्वारा विशेष प्रार्थना सभाएँ, निबंध प्रतियोगिताएँ और झांकी प्रदर्शन हो रहे हैं।
दिल्ली में लाल किले से लेकर इंडिया गेट तक सुरक्षा के व्यापक इंतज़ाम किए गए हैं ताकि समारोह शांतिपूर्वक संपन्न हो सके।
निष्कर्ष
1 नवंबर 2025 का यह दिन भारत के राज्यों की एकता और प्रगति का प्रतीक बन गया है। लाल किले का समारोह न केवल सांस्कृतिक उत्सव है, बल्कि यह देश की विविधता और लोकतांत्रिक भावना का जीवंत उदाहरण भी है।
डिस्क्लेमर: यह लेख विभिन्न समाचार एजेंसियों और सरकारी प्रेस विज्ञप्तियों पर आधारित है। अंतिम जानकारी या कार्यक्रम में किसी भी प्रकार के बदलाव के लिए संस्कृति मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट देखें।











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