प्रकाशित: 6 नवंबर 2025 | लेखक: अजय वर्मा
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले वोटर सूची में लगभग 10% कटौती का मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। राज्य के 74 मिलियन से अधिक मतदाताओं में से करीब 7-8 मिलियन लोगों के नाम हटाए जाने के आरोप सामने आए हैं। विपक्ष ने इसे “लोकतंत्र की आवाज़ को कमजोर करने” की साजिश बताते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) और चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं।

वोटर लिस्ट में कटौती पर सियासी संग्राम
विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि यह कटौती विशेष रूप से गरीब, अल्पसंख्यक और ग्रामीण मतदाताओं को प्रभावित करती है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रवक्ता ने कहा, “यह स्पष्ट रूप से एक राजनीतिक चाल है ताकि कमजोर वर्गों के वोट को दबाया जा सके।”
वहीं, कांग्रेस पार्टी ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताते हुए चुनाव आयोग से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। पार्टी नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि “अगर वोटर लिस्ट से लाखों नाम हटाए गए हैं, तो यह लोकतंत्र पर सीधा प्रहार है। आयोग को पारदर्शिता बनाए रखनी चाहिए।”
इसके जवाब में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। पार्टी के बिहार प्रभारी ने कहा कि “वोटर लिस्ट का पुनरीक्षण एक नियमित प्रक्रिया है, जिसे आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार किया गया है। किसी भी वर्ग के साथ भेदभाव नहीं हुआ।”
चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया और जांच
चुनाव आयोग ने इस पूरे मामले पर संज्ञान लेते हुए जिला निर्वाचन अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है। आयोग का कहना है कि नामों की कटौती और संशोधन का कार्य डिजिटल सत्यापन और जनगणना डेटा के आधार पर किया गया है।
सूत्रों के अनुसार, आयोग ने सभी जिलों को 10 नवंबर तक विस्तृत रिपोर्ट जमा करने के निर्देश दिए हैं। यदि कहीं अनियमितता पाई जाती है, तो पुनः सूची जारी की जा सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आगामी चुनाव के नतीजों को काफी प्रभावित कर सकता है। मतदाताओं के बीच असंतोष बढ़ने की संभावना जताई जा रही है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां ग्रामीण और अल्पसंख्यक समुदायों की जनसंख्या अधिक है।
राजनीतिक माहौल और आगामी चरण
बिहार विधानसभा चुनाव का पहला चरण आज से शुरू हो चुका है। 121 सीटों पर मतदान जारी है, जबकि शेष चरणों का कार्यक्रम नवंबर के मध्य तक चलेगा। राजनीतिक दल अब मतदाताओं को साधने के लिए अपने प्रचार अभियान को और तेज कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह अगले सप्ताह बिहार में कई चुनावी सभाएँ करने वाले हैं। वहीं विपक्ष भी “बचाओ लोकतंत्र” के नारे के साथ जनसभाओं की तैयारी कर रहा है।
राज्य में इस बार मुकाबला त्रिकोणीय माना जा रहा है — BJP-JD(U) गठबंधन बनाम RJD-Congress गठबंधन, जबकि तीसरे मोर्चे के रूप में वाम दल भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।डिस्क्लेमर:
यह समाचार विभिन्न राजनीतिक स्रोतों, मीडिया रिपोर्ट्स और चुनाव आयोग की सार्वजनिक सूचनाओं पर आधारित है। स्थिति में समय-समय पर बदलाव संभव है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे आधिकारिक वेबसाइटों से अद्यतन जानकारी प्राप्त करें।















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