प्रकाशित: 7 नवंबर 2025 | लेखक: अजय वर्मा
मतदान प्रतिशत में ऐतिहासिक वृद्धि
बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान में इस बार ऐतिहासिक रिकॉर्ड दर्ज हुआ है। चुनाव आयोग के अनुसार, पहले चरण में लगभग 64.66 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो राज्य के पिछले सभी चुनावों की तुलना में सबसे अधिक है। यह आंकड़ा 2015 और 2020 के चुनावों से भी आगे निकल गया है, जहाँ क्रमशः 57.5% और 60.3% मतदान हुआ था।

महिलाओं की भागीदारी में उत्साह
चुनाव आयोग ने बताया कि महिलाओं की भागीदारी इस बार विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। कई जिलों में महिलाओं का मतदान प्रतिशत पुरुषों से अधिक रहा है। सामाजिक संगठनों ने इसे “लोकतंत्र में बढ़ती जागरूकता और विश्वास का प्रतीक” बताया है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी सुबह से ही लंबी कतारें देखने को मिलीं, जो मतदान के प्रति जनता की गंभीरता को दर्शाती हैं।
पहले चरण में मतदान वाले क्षेत्र
पहले चरण में कुल 12 जिलों की 71 सीटों पर मतदान संपन्न हुआ। इनमें गया, औरंगाबाद, नवादा, जमुई, बांका, भोजपुर, अरवल और रोहतास जैसे प्रमुख जिले शामिल थे। प्रशासन ने 33,000 से अधिक मतदान केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए थे। केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती के साथ ही ड्रोन निगरानी भी की गई।
शांतिपूर्ण मतदान और प्रशासन की तैयारी
राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि मतदान प्रक्रिया शांतिपूर्ण रही और कहीं से भी बड़ी हिंसक घटना की रिपोर्ट नहीं मिली। विशेष रूप से नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा बलों ने सतर्कता बरती। मतदान केंद्रों पर दिव्यांग और वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी, जिससे मतदान का अनुभव सहज और सुरक्षित बना।
राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएँ
भाजपा, जदयू, कांग्रेस और राजद समेत सभी प्रमुख दलों ने इस रिकॉर्ड मतदान को जनता की जागरूकता का प्रमाण बताया। भाजपा ने इसे “विकास के समर्थन में जनमत” कहा, जबकि राजद ने दावा किया कि “जनता इस बार बदलाव चाहती है।” चुनावी रुझान विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च मतदान दर से विपक्ष को लाभ हो सकता है, लेकिन अंतिम नतीजे दूसरे और तीसरे चरण के मतदान पर निर्भर करेंगे।
अगले चरण की तैयारी
अब सभी की नजरें दूसरे चरण के मतदान पर हैं, जो अगले सप्ताह होने वाला है। चुनाव आयोग ने मतदाताओं से अपील की है कि वे लोकतंत्र के इस पर्व में उत्साहपूर्वक भाग लें। सोशल मीडिया पर भी मतदान को लेकर जागरूकता अभियान जारी हैं, जिनमें युवाओं और प्रथम बार वोट डालने वालों की भूमिका प्रमुख रही है।
डिसकलेमर
यह समाचार बिहार राज्य चुनाव आयोग, स्थानीय प्रशासन और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। अंतिम आधिकारिक आंकड़े आयोग द्वारा जारी किए जाने पर भिन्न हो सकते हैं। पाठकों से अनुरोध है कि वे सटीक जानकारी के लिए बिहार चुनाव आयोग की वेबसाइट या आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियों को देखें। लेखक/प्रकाशक किसी भी संभावित परिवर्तन या त्रुटि के लिए उत्तरदायी नहीं होंगे।















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