तारीख: 7 दिसंबर 2025
लेखक: अजय वर्मा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक महत्वपूर्ण संबोधन के दौरान “Hindu Rate of Growth” जैसे टैग को तीखे शब्दों में खारिज किया। उन्होंने इसे “गुलामी की मानसिकता” और “नए भारत के आत्मविश्वास के खिलाफ” बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह शब्द भारत की क्षमता को कम आंकने और देश को पीछे रखने वाली सोच का हिस्सा था, जो अब तेजी से बदल रहा है।

‘Hindu Rate of Growth’ शब्द को लेकर PM Modi की कड़ी प्रतिक्रिया
पीएम मोदी ने कहा कि दशकों पहले भारत की धीमी आर्थिक वृद्धि को “Hindu Rate of Growth” जैसा शब्द देकर प्रस्तुत किया गया था, जो न केवल अपमानजनक था, बल्कि भारतीय समाज की आर्थिक क्षमता का गलत आकलन भी था। उन्होंने कहा कि यह शब्द उन लोगों की सोच से आया, जो भारत को कभी तेज़ी से बढ़ते राष्ट्र के रूप में देखना ही नहीं चाहते थे।
उन्होंने आगे कहा कि आज भारत के विकास, नवाचार, स्टार्टअप इकोनॉमी और वैश्विक प्रभाव को देखकर यह साफ है कि देश उस पुरानी मानसिकता से बहुत आगे बढ़ चुका है।
भारत के बढ़ते आर्थिक आत्मविश्वास को PM ने रेखांकित किया
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने भारत की वर्तमान आर्थिक स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि देश अब दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। उन्होंने बताया कि डिजिटल अर्थव्यवस्था, मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा क्षेत्रों में किए जा रहे अभूतपूर्व सुधारों ने भारत की विकास दर को एक नई दिशा दी है।
पीएम मोदी ने कहा कि अब भारत “मांगने वाला नहीं, बल्कि योगदान देने वाला देश” बन चुका है और इसे दुनिया स्वीकार भी कर रही है। उन्होंने इसे “नए भारत के आत्मविश्वास का प्रतीक” बताया।
विकास के लिए सरकार की प्राथमिकताएँ
प्रधानमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी का भारत तकनीक, नवाचार, पारदर्शिता और तेज़ नीति-निर्माण पर आधारित मॉडल पर आगे बढ़ रहा है। सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल हैं:
- वैश्विक निवेश आकर्षित करना
- युवा-केंद्रित आर्थिक नीतियाँ
- इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े स्तर पर निवेश
- निर्यात बढ़ाना और भारतीय उद्योग को प्रतिस्पर्धी बनाना
- डिजिटल अर्थव्यवस्था और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत बनाना
उन्होंने कहा कि इन सभी प्रयासों ने भारत को पिछली सोच से मुक्त कर एक उच्च विकास दर वाले राष्ट्र के रूप में स्थापित किया है।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की स्थिति मजबूत
प्रधानमंत्री मोदी ने दावा किया कि आज भारत वैश्विक मुद्दों पर निर्णायक भूमिका निभा रहा है। चाहे अंतरराष्ट्रीय व्यापार हो, ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन या सामरिक संतुलन — भारत की आवाज पहले से कहीं अधिक मजबूत हुई है।
उन्होंने कहा कि “Hindu Rate of Growth” जैसे शब्दों के पीछे छिपी मानसिकता को भारत ने पीछे छोड़ दिया है और अब देश आत्मविश्वास, क्षमता और तेज़ विकास का प्रतीक बन चुका है।
Disclaimer: यह लेख उपलब्ध समाचार स्रोतों, सरकारी बयानों और सार्वजनिक भाषणों में दी गई सूचनाओं पर आधारित है। वास्तविक स्थितियाँ समय-समय पर बदल सकती हैं। पाठक आधिकारिक स्रोतों और सरकारी विवरणों की पुष्टि अवश्य करें।















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