दिनांक: 16 दिसंबर 2025
लेखक: अजय वर्मा
छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के क्रियान्वयन में एक बड़ी अनियमितता सामने आई है। गरियाबंद जिले के मैनपुर जनपद पंचायत क्षेत्र में अधूरे आवासों को कागजों में पूरा दिखाकर उनका लोकार्पण कराने का मामला उजागर हुआ है। इस गंभीर लापरवाही और गड़बड़ी के बाद शासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जनपद पंचायत मैनपुर की मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) श्वेता वर्मा को उनके पद से हटा दिया है। इस कार्रवाई से प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।

अधूरे मकानों को पूरा दिखाने का आरोप
जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनाए जा रहे कई घर अभी पूरी तरह तैयार नहीं थे, लेकिन उन्हें रिकॉर्ड में पूर्ण दर्शाया गया। इतना ही नहीं, इन अधूरे आवासों को वर्चुअल कार्यक्रम के माध्यम से पूरा बताकर लोकार्पण भी कर दिया गया। जब इस मामले की जांच हुई, तो जमीनी हकीकत और कागजी रिपोर्ट में बड़ा अंतर सामने आया।
जांच में उजागर हुई गंभीर अनियमितता
शिकायत मिलने के बाद उच्च अधिकारियों द्वारा मामले की प्राथमिक जांच कराई गई। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि योजना के क्रियान्वयन में नियमों की अनदेखी की गई है। लाभार्थियों को अभी भी अधूरे मकानों में रहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा था, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें पूर्ण आवास का लाभार्थी दर्शाया गया था। इसे प्रशासनिक लापरवाही और जिम्मेदारी के निर्वहन में गंभीर चूक माना गया।
CEO श्वेता वर्मा पर गिरी गाज
मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य शासन ने जनपद पंचायत मैनपुर की CEO श्वेता वर्मा को तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया। शासन का मानना है कि योजना के सफल और पारदर्शी क्रियान्वयन की जिम्मेदारी जनपद स्तर पर CEO की होती है। ऐसे में इस तरह की अनियमितता सामने आना सीधे तौर पर प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल खड़ा करता है।
प्रधानमंत्री आवास योजना की साख पर असर
प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराना है। लेकिन इस तरह की गड़बड़ियां योजना की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाती हैं। अधूरे मकानों को पूरा दिखाने से न केवल सरकार की छवि धूमिल होती है, बल्कि वास्तविक लाभार्थियों के अधिकारों का भी हनन होता है।
प्रशासन ने दिए सख्त निर्देश
इस प्रकरण के बाद शासन और जिला प्रशासन ने सभी जनपद पंचायतों को निर्देश दिए हैं कि आवास योजना से जुड़े कार्यों की दोबारा समीक्षा की जाए। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी स्तर पर गलत जानकारी या फर्जी रिपोर्टिंग न हो। भविष्य में ऐसी अनियमितता पाए जाने पर और भी कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
आगे हो सकती है और कार्रवाई
सूत्रों के अनुसार, यह मामला यहीं खत्म नहीं हो सकता। यदि विस्तृत जांच में अन्य अधिकारियों या कर्मचारियों की भूमिका सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। शासन ने स्पष्ट किया है कि जनकल्याणकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार और लापरवाही किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
डिस्क्लेमर: यह लेख मीडिया रिपोर्ट्स और प्रारंभिक प्रशासनिक जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। जांच पूरी होने के बाद तथ्यों में बदलाव संभव है। पाठकों से अनुरोध है कि अंतिम और आधिकारिक जानकारी के लिए संबंधित विभाग द्वारा जारी आदेशों और सूचनाओं पर ही भरोसा करें।











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