दिनांक: 9 मार्च 2026
लेखक: Ajay Verma
छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान धान खरीदी का मुद्दा एक बार फिर जोरदार तरीके से उठाया गया। बस्तर क्षेत्र के किसानों की समस्याओं को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरते हुए सदन में तीखी बहस की। कांग्रेस विधायक कवासी लखमा ने आरोप लगाया कि प्रदेश के कई किसानों का धान अब तक नहीं खरीदा गया है, जिससे उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस मुद्दे को लेकर सदन में काफी देर तक हंगामा चलता रहा।

कवासी लखमा ने कहा कि सरकार ने किसानों से धान खरीदी को लेकर कई बड़े वादे किए थे, लेकिन जमीनी स्तर पर कई किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने दावा किया कि बस्तर क्षेत्र के हजारों किसानों का धान समर्थन मूल्य पर नहीं खरीदा गया है। इसके कारण किसानों के सामने कर्ज चुकाने और परिवार का पालन-पोषण करने की समस्या खड़ी हो गई है।
किसानों की समस्याओं को लेकर उठे सवाल
विधानसभा में इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान विपक्ष ने सरकार से सवाल किया कि जिन किसानों का धान अब तक नहीं खरीदा गया है, उनके नुकसान की भरपाई कौन करेगा। विपक्षी विधायकों का कहना था कि सरकार को किसानों की समस्याओं पर तुरंत ध्यान देना चाहिए और धान खरीदी की प्रक्रिया को पारदर्शी और प्रभावी बनाना चाहिए।
कवासी लखमा ने कहा कि किसानों की मेहनत का उचित मूल्य मिलना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर धान खरीदी केंद्रों में अव्यवस्था है और किसानों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ रहा है। इस वजह से किसानों को काफी परेशानी हो रही है।
मंत्री के जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ विपक्ष
धान खरीदी के मुद्दे पर सरकार की ओर से मंत्री ने जवाब दिया और कहा कि सरकार किसानों के हितों को लेकर गंभीर है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा धान खरीदी की प्रक्रिया लगातार जारी है और जहां भी समस्याएं सामने आ रही हैं, उन्हें जल्द ही दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।
हालांकि मंत्री के जवाब से विपक्ष संतुष्ट नहीं हुआ। विपक्षी विधायकों ने कहा कि सरकार का जवाब वास्तविक स्थिति को नहीं दर्शाता है। उनका आरोप था कि जमीनी स्तर पर किसानों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, जिन्हें सरकार नजरअंदाज कर रही है।
सदन में नारेबाजी और वॉकआउट
मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने सदन में नारेबाजी शुरू कर दी। कुछ देर तक सदन का माहौल काफी गरम रहा और विपक्षी विधायक सरकार के खिलाफ नारे लगाते रहे। बाद में विरोध जताते हुए विपक्ष के कई विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
विधानसभा में हुए इस हंगामे के बाद धान खरीदी का मुद्दा एक बार फिर प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। किसानों से जुड़े इस मुद्दे को लेकर आने वाले दिनों में भी राजनीतिक बयानबाजी और बहस जारी रहने की संभावना है।
प्रदेश के किसान संगठनों ने भी सरकार से मांग की है कि धान खरीदी की प्रक्रिया को समय पर और पारदर्शी तरीके से पूरा किया जाए ताकि किसानों को किसी तरह की आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े।
किसानों के लिए समाधान की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि धान खरीदी जैसे मुद्दों पर सरकार और प्रशासन को मिलकर काम करने की जरूरत है। यदि समय पर किसानों की उपज खरीदी जाए और भुगतान की प्रक्रिया तेज की जाए, तो किसानों की आर्थिक स्थिति बेहतर हो सकती है।
छत्तीसगढ़ में धान किसानों की संख्या काफी ज्यादा है और राज्य की अर्थव्यवस्था में उनका महत्वपूर्ण योगदान है। ऐसे में किसानों से जुड़े मुद्दों का समाधान करना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।
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