6 अक्टूबर 2025 — राष्ट्रीय समाचार डेस्क
पर्यावरण कार्यकर्ता और सामाजिक नेता सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आज केंद्र सरकार और लद्दाख प्रशासन को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने वांगचुक की पत्नी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार से जवाब मांगा है कि उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत क्यों और किन परिस्थितियों में गिरफ्तार किया गया।

क्या है मामला?
लद्दाख के प्रसिद्ध पर्यावरणविद सोनम वांगचुक को कुछ दिन पहले लद्दाख पुलिस ने हिरासत में लिया था। पुलिस ने उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत कार्रवाई की थी। प्रशासन का कहना है कि वांगचुक के हालिया बयानों और जनसभाओं से क्षेत्र में “शांति भंग” होने की संभावना थी। वहीं, वांगचुक के समर्थकों का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह से राजनीतिक और आवाज़ दबाने की कोशिश है।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली पीठ ने केंद्र और लद्दाख प्रशासन से पूछा कि वांगचुक को NSA जैसे कठोर कानून के तहत गिरफ्तार करने की क्या आवश्यकता पड़ी, जबकि वह एक सार्वजनिक व्यक्ति हैं और अहिंसक तरीक़े से अपनी बात रखते हैं। कोर्ट ने मामले पर दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
सोनम वांगचुक का पृष्ठभूमि
सोनम वांगचुक लद्दाख के एक प्रसिद्ध शिक्षाविद् और पर्यावरण कार्यकर्ता हैं। उन्होंने “आईस स्तूप” (Ice Stupa) जैसी तकनीक विकसित की थी जो पानी की समस्या से जूझ रहे पहाड़ी इलाकों में बेहद उपयोगी साबित हुई। वे “सेक्युलर स्कूल” आंदोलन के संस्थापक भी हैं और सतत विकास के लिए लंबे समय से सक्रिय हैं।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ
विपक्षी दलों और नागरिक संगठनों ने वांगचुक की गिरफ्तारी को “लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला” बताया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा कि शांतिपूर्ण विरोध और पर्यावरण के लिए आवाज़ उठाना अपराध नहीं है। वहीं, भाजपा नेताओं का कहना है कि “कानून ने जो उचित समझा, वही किया गया”।
अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद तय की है। अदालत ने कहा कि जब तक केंद्र और लद्दाख प्रशासन अपना जवाब नहीं देते, तब तक वांगचुक की स्थिति पर नज़दीकी निगरानी रखी जाएगी।
डिस्क्लेमर
यह लेख विभिन्न समाचार स्रोतों और एजेंसियों की रिपोर्ट्स पर आधारित है। लेख में दी गई जानकारी समाचार प्रकाशनों पर निर्भर है, जिनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना पाठक की ज़िम्मेदारी है। लेखक या प्रकाशक इस लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सटीकता या पूर्णता की व्यक्तिगत गारंटी नहीं देता।











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